स्वयं कर्म करोत्यत्मा स्वयं तत्फलमश्नुते ।
स्वयं भ्रमति संसारे स्वयं तस्माद्विमुच्यते ।।
जीवात्मा अपने कर्म के मार्ग से जाता है। और जो भी भले बुरे परिणाम कर्मो के आते है उन्हें भोगता है। अपने ही कर्मो से वह संसार में बंधता है और अपने ही कर्मो से बन्धनों से छूटता है।
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