मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
चाणक्य नीति • अध्याय 6 • श्लोक 21
सुश्रान्तोऽपि वहेत भारं शीतोष्णं न च पश्यति । सन्तुष्टश्चरते नित्यं त्रीणि शिक्षेच्च गर्दभात् ।।
गधे से ये तीन बाते सीखे - १. अपना बोझा ढोना ना छोड़े २. सर्दी गर्मी की चिंता ना करे ३. सदा संतुष्ट रहे
पूरा ग्रंथ पढ़ें
चाणक्य नीति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

चाणक्य नीति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें