सुश्रान्तोऽपि वहेत भारं शीतोष्णं न च पश्यति ।
सन्तुष्टश्चरते नित्यं त्रीणि शिक्षेच्च गर्दभात् ।।
गधे से ये तीन बाते सीखे -
१. अपना बोझा ढोना ना छोड़े
२. सर्दी गर्मी की चिंता ना करे
३. सदा संतुष्ट रहे
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