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चाणक्य नीति • अध्याय 6 • श्लोक 2
पक्षिणां काकचाण्डालः पशूनां चैव कुक्कुरः । मुनीनां पापी चाण्डालः सर्वचाण्डालनिन्दकः ।।
पक्षीयों में कौवा नीच है. पशुओ में कुत्ता नीच है. जो तपस्वी पाप करता है वो घिनौना है. लेकिन जो दूसरो की निंदा करता है वह सबसे बड़ा चांडाल है.
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