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चाणक्य नीति • अध्याय 6 • श्लोक 18
प्रत्युत्थानञ्च युध्द्ञ्च संविभागञ्च बन्धुषु । स्वयमाक्रम्यभुक्तञ्चशिक्षेच्चत्वारिकुक्कुटात् ।।
मुर्गे से ये चार बाते सीखे - १. सही समय पर उठे २. नीडर बने और लढ़े ३. संपत्ति का रिश्तेदारों से उचित बटवारा करे ४. अपने कष्ट से अपना रोजगार प्राप्त करे
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