ऋणकर्ता पिता शत्रुमाता च व्यभिचारिणी ।
भार्या रूपवती शत्रुः पुत्रः शत्रुरपण्डितः ।।
अपने ही घर में व्यक्ति के ये शत्रु हो सकते है-
उसका बाप यदि वह हरदम कर्ज में डूबा रहता है
उसकी माँ यदि वह दुसरे पुरुष से संग करती है
सुन्दर पत्नी
वह लड़का जिसने शिक्षा प्राप्त नहीं की
पूरा ग्रंथ पढ़ें
चाणक्य नीति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
चाणक्य नीति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।