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चाणक्य नीति • अध्याय 5 • श्लोक 3
तावद्भयेन भेतव्यं यावद् भयमनागतम् । आगतं तु भयं वीक्ष्यं प्रहर्तव्यमशंकया ।।
यदि आप पर मुसीबत आती नहीं है तो उससे सावधान रहे। लेकिन यदि मुसीबत आ जाती है तो किसी भी तरह उससे छुटकारा पाए।
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