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चाणक्य नीति • अध्याय 5 • श्लोक 2
यथा चतुर्भिः कनकं पराक्ष्यते निघर्षणं छेदनतापताडनैः । तथा चतुर्भिः पुरुषः परीक्ष्य़ते त्यागेन शीलेन गुणेन कर्मणा ।।
सोने की परख उसे घिस कर, काट कर, गरम कर के और पीट कर की जाती है। उसी तरह व्यक्ति का परीक्षण वह कितना त्याग करता है, उसका आचरण कैसा है, उसमे गुण कौनसे है और उसका व्यवहार कैसा है इससे होता है।
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