विद्या मित्रं प्रवासेषु भार्या मित्रं गृहेषु च ।
व्यधितस्यौषधं मित्रं धर्मो मित्रं मृतस्य च ।।
जब आप सफ़र पर जाते हो तो विद्यार्जन ही आपका मित्र है। घर में पत्नी मित्र है। बीमार होने पर दवा मित्र है। अर्जित पुण्य मृत्यु के बाद एकमात्र मित्र है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
चाणक्य नीति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
चाणक्य नीति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।