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चाणक्य नीति • अध्याय 5 • श्लोक 15
विद्या मित्रं प्रवासेषु भार्या मित्रं गृहेषु च । व्यधितस्यौषधं मित्रं धर्मो मित्रं मृतस्य च ।।
जब आप सफ़र पर जाते हो तो विद्यार्जन ही आपका मित्र है। घर में पत्नी मित्र है। बीमार होने पर दवा मित्र है। अर्जित पुण्य मृत्यु के बाद एकमात्र मित्र है।
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