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चाणक्य नीति • अध्याय 5 • श्लोक 13
जन्ममृत्युं हि यात्येको भुनक्त्येकं शुभाशुभम् । नरकेषु पतत्येक एको याति परां गतिम् ।।
व्यक्ति अकेले ही पैदा होता है। अकेले ही मरता है। अपने कर्मो के शुभ अशुभ परिणाम अकेले ही भोगता है। अकेले ही नरक में जाता है या सदगति प्राप्त करता है।
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