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चाणक्य नीति • अध्याय 5 • श्लोक 1
गुरुरग्निर्द्वि जातीनां वर्णानां ब्राह्मणो गुरुः । पतिरेव गुरुः स्त्रीणां सर्वस्याभ्यागतो गुरुः ।।
ब्राह्मणों को अग्नि की पूजा करनी चाहिए। दुसरे लोगों को ब्राह्मण की पूजा करनी चाहिए। पत्नी को पति की पूजा करनी चाहिए तथा दोपहर के भोजन के लिए जो अतिथि आये उसकी सभी को पूजा करनी चाहिए।
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