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चाणक्य नीति • अध्याय 4 • श्लोक 19
अग्निर्देवो द्विजातीनां मुनीनां हृदि दैवतम् । प्रतिमा त्वल्पबुध्दीनां सर्वत्र समदर्शिनाम् ।।
द्विज अग्नि में भगवान् देखते है। भक्तो के ह्रदय में परमात्मा का वास होता है। जो अल्प मति के लोग है वो मूर्ति में भगवान् देखते है। लेकिन जो व्यापक दृष्टी रखने वाले लोग है, वो यह जानते है की भगवान सर्व व्यापी है।
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