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चाणक्य नीति • अध्याय 4 • श्लोक 15
अनभ्यासे विषं शास्त्रमजीर्णे भोजनं विषम् । दरिद्रस्य विषं गोष्ठी वृध्दस्य तरुणी विषम् ।।
जिस अध्यात्मिक सीख का आचरण नहीं किया जाता वह जहर है। जिसका पेट ख़राब है उसके लिए भोजन जहर है। निर्धन व्यक्ति के लिए लोगो का किसी सामाजिक या व्यक्तिगत कार्यक्रम में एकत्र होना जहर है।
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