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चाणक्य नीति • अध्याय 4 • श्लोक 11
सकृज्जल्पन्ति राजानः सकृज्जल्पन्ति पण्डिताः । सकृत्कन्याः प्रदीयन्ते त्रीण्येतानि सकृत्सकृत् ।।
यह बाते एक बार ही होनी चाहिए - १. राजा का बोलना २. बिद्वान व्यक्ति का बोलना ३. लड़की का ब्याहना
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