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चाणक्य नीति • अध्याय 4 • श्लोक 10
संसारतापदग्धानां त्रयो विश्रान्तेहेतवः । अपत्यं च कलत्रं च सतां सड्गतिरेव च ।।
जब व्यक्ति जीवन के दुःख से झुलसता है उसे निम्नलिखित ही सहारा देते है - १. पुत्र और पुत्री २. पत्नी ३. भगवान् के भक्त
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