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चाणक्य नीति • अध्याय 4 • श्लोक 1
आयुः कर्म च वित्तञ्च विद्या निधनमेव च । पञ्चैतानि हि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः ।।
निम्नलिखित बातें माता के गर्भ में ही निश्चित हो जाती है - १. व्यक्ति कितने साल जियेगा २. वह किस प्रकार का काम करेगा ३. उसके पास कितनी संपत्ति होगी ४. उसकी मृत्यु कब होगी
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