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चाणक्य नीति • अध्याय 17 • श्लोक 9
न दानैः शुध्यते नारी नोपवासशतैरपि । न तीर्थसेवया तद्वद् भतुः पादोदकैर्यथा ।।
स्त्री दान दे कर, उपवास रख कर और पवित्र जल का पान करके पावन नहीं हो सकती। वह पति के चरणों को धोने से और ऐसे जल का पान करने से शुद्ध होती है।
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