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चाणक्य नीति • अध्याय 17 • श्लोक 7
तक्षकस्य विषं दन्ते मक्षिकाया मुखे विषम् । वृश्चिकस्य विषं पुच्छे सर्वाङ्गे दुर्जने विषम् ।।
साप के दंश में विष होता है। कीड़े के मुह में विष होता है। बिच्छू के डंख में विष होता है। लेकिन दुष्ट व्यक्ति तो पूर्ण रूप से विष से भरा होता है।
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