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चाणक्य नीति • अध्याय 17 • श्लोक 16
राजा वेश्या यमश्चाग्निः चौराः बालक याचकाः । परदुःखं न जानन्ति अष्टमो ग्रामकण्टकः ।।
ये आठो कभी दुसरो का दुःख नहीं समझ सकते - १. राजा २. वेश्या ३. यमराज ४. अग्नि ५. चोर ६. छोटा बच्चा ७. भिखारी और ८. कर वसूल करने वाला.
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