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चाणक्य नीति • अध्याय 17 • श्लोक 14
आहारनिद्रा भय मैथुरानि समानि चैतानि नृणां पशूनाम् । ज्ञाने नराणामधिको विशेषो ज्ञानेन हीना पशुभिः समानाः ।।
मनुष्यों में और निम्न स्तर के प्राणियों में खाना, सोना, घबराना और गमन करना समान है। मनुष्य अन्य प्राणियों से श्रेष्ठ है तो विवेक ज्ञान की बदौलत। इसलिए जिन मनुष्यों में ज्ञान नहीं है वे पशु है।
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