कोऽर्थान्प्राप्य न गर्वितो विषयिणः कस्यापदोऽस्तंगताः ।
स्त्रीभिः कस्य न खण्डितं भुवि मनः को नाम राज्ञप्रियः ।।
कः कालस्य न गोचरत्वमगमत् कोऽर्थो गतो गौरवम् ।
को वा दुर्जनदुर्गुणेषु पतितः क्षेमेण यातः पथि ।।
ऐसा यहाँ कौन है जिसमे दौलत पाने के बाद मस्ती नहीं आई। क्या कोई बेलगाम आदमी अपने संकटों पर रोक लगा पाया। इस दुनिया में किस आदमी को औरत ने कब्जे में नहीं किया। किस के ऊपर राजा की हरदम मेहेरबानी रही। किसके ऊपर समय के प्रकोप नहीं हुए। किस भिखारी को यहाँ शोहरत मिली। किस आदमी ने दुष्ट के दुर्गुण पाकर सुख को प्राप्त किया।
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