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चाणक्य नीति • अध्याय 16 • श्लोक 13
प्रियवाक्यप्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति मानवाः । तस्मात् तदेव वक्तव्यं वचने का दरिद्रता ।।
सभी जीव मीठे वचनों से आनंदित होते है। इसीलिए हम सबसे मीठे वचन कहे। मीठे वचन की कोई कमी नहीं है।
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