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चाणक्य नीति • अध्याय 16 • श्लोक 10
क्षीयन्ते सर्वदानानि यज्ञहोमबलि क्रियाः । न क्षीयते पात्रदानम भयं सर्वदेहिनाम् ।।
सभी परोपकार और तप तात्कालिक लाभ देते है। लेकिन सुपात्र को जो दान दिया जाता है और सभी जीवो को जो संरक्षण प्रदान किया जाता है उसका पुण्य कभी नष्ट नहीं होता।
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