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चाणक्य नीति • अध्याय 14 • श्लोक 9
यस्माच्च प्रियमिच्छेतु तस्य ब्रूयात्सदा प्रियम् । व्याधो मृगवधं गन्तुं गीतं गायति सुस्वरम् ।।
यदि हम किसीसे कुछ पाना चाहते है तो उससे ऐसे शब्द बोले जिससे वह प्रसन्न हो जाए। उसी प्रकार जैसे एक शिकारी मधुर गीत गाता है जब वह हिरन पर बाण चलाना चाहता है।
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