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चाणक्य नीति • अध्याय 14 • श्लोक 15
एक एव पदार्थस्तु त्रिधा भवति वीक्षितः । कुणपंकामिनी मांसं योगिभिः कामिभिः श्वभिः ।।
एक ही वस्तु देखने वालो की योग्यता के अनुरूप बिलग बिलग दिखती है। तप करने वाले में वस्तु को देखकर कोई कामना नहीं जागती। लम्पट आदमी को हर वास्तु में स्त्री दिखती है। कुत्ते को हर वस्तु में मांस दिखता है।
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