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चाणक्य नीति • अध्याय 14 • श्लोक 11
अग्निरापः स्त्रियो मूर्खाः सर्पो राजकुलानि च । नित्यं यत्नेन सेव्यानि सद्यः प्राणहराणि षट् ।।
हम इनके साथ बहुत सावधानी से पेश आये - १. अग्नि २. पानी ३. औरत ४. मुर्ख ५. साप ६. राज परिवार के सदस्य जब जब हम इनके संपर्क में आते है, ये हमें एक झटके में मौत तक पंहुचा सकते है।
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