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चाणक्य नीति • अध्याय 14 • श्लोक 10
अत्यासन्ना विनाशाय दूरस्था न फलप्रदाः । सेव्यतां मध्यभागेन राजविह्निगुरुस्त्रियः ।।
जो व्यक्ति राजा से, अग्नि से, धर्म गुरु से और स्त्री से बहुत परिचय बढ़ाता है वह विनाश को प्राप्त होता है। जो व्यक्ति इनसे पूर्ण रूप से अलिप्त रहता है, उसे अपना भला करने का कोई अवसर नहीं मिलता। इसलिए इनसे सुरक्षित अंतर रखकर सम्बन्ध रखना चाहिए।
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