राज्ञधर्मणि धर्मिष्ठाः पापे पापाः समे समाः ।
राजानमनुवर्तन्ते यथा राजा तथा प्रजाः ।।
यदि राजा पुण्यात्मा है तो प्रजा भी वैसी ही होती है। यदि राजा पापी है तो प्रजा भी पापी। यदि वह सामान्य है तो प्रजा सामान्य। प्रजा के सामने राजा का उद्हारण होता है। और वो उसका अनुसरण करती है।
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