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चाणक्य नीति • अध्याय 13 • श्लोक 17
यत् खनित्वा खनित्रेण भुतले वारि विन्दति । तथा गुरुगतां विद्या शुश्रुषुरधिगच्छति ।।
यदि आदमी उपकरण का सहारा ले तो गर्भजल से पानी निकाल सकता है। उसी तरह यदि विद्यार्थी अपने गुरु की सेवा करे तो गुरु के पास जो ज्ञान निधि है उसे प्राप्त करता है।
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