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चाणक्य नीति • अध्याय 13 • श्लोक 1
मुहूर्त्तं माप जीवेच्च नरः शुक्लेण कर्मणा । न कल्पमापि कष्टेन लोकद्वयविरोधिना ।।
यदि आदमी एक पल के लिए भी जिए तो भी उस पल को वह शुभ कर्म करने में खर्च करे। एक कल्प तक जी कर कोई लाभ नहीं। दोनों लोक इस लोक और पर-लोक में तकलीफ होती है।
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