मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
चाणक्य नीति • अध्याय 12 • श्लोक 9
विप्राऽस्मिन्नगरे महान् कथयकस्तालद्रुमाणां गणः को दाता रजको ददाति वसनं प्रातर्गृ हीत्वा निशि । को दक्षः परवित्तदारहरणे सर्वोऽपि दक्षो जनः कस्माज्जीवसि हे सखे विष कृमिन्यायेन जीवाम्यहम् ।।
एक अजनबी ने एक ब्राह्मण से पूछा - "बताइए, इस शहर में महान क्या है?". ब्राह्मण ने जवाब दिया की खजूर के पेड़ का समूह महान है। अजनबी ने सवाल किया की यहाँ दानी कौन है? जवाब मिला के वह धोबी जो सुबह कपडे ले जाता है और शाम को लौटाता है। प्रश्न हुआ यहाँ सबसे काबिल कौन है। जवाब मिला यहाँ हर कोई दुसरे का द्रव्य और दारा हरण करने में काबिल है। प्रश्न हुआ की आप ऐसी जगह रह कैसे लेते हो? जवाब मिला की जैसे एक कीड़ा एक दुर्गन्ध युक्त जगह पर रहता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
चाणक्य नीति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

चाणक्य नीति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें