जलबिन्दुनिपातेन क्रमशः पूर्यते घटः ।
स हेतु सर्वविद्यानां धर्मस्य च धनस्य च ।।
बूंद बूंद से सागर बनता है। इसी तरह बूंद बूंद से ज्ञान, गुण और संपत्ति प्राप्त होते है।
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