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चाणक्य नीति • अध्याय 12 • श्लोक 15
धर्मे तत्परता मुखे मधुरता दाने समुत्साहता मित्रेऽवंचकता गुरौ विनयता चित्तेऽतिगम्भीरता । आचारे शुचिता गुणे रसिकता शास्त्रेषु विज्ञातृता रूपे सुन्दरता शिवे भजनता त्वय्यस्तिभी राघवः ।।
भगवान राम में ये सब गुण है - १. सद्गुणों में प्रीती २. मीठे वचन ३. दान देने की तीव्र इच्छा शक्ति ४. मित्रो के साथ कपट रहित व्यवहार ५. गुरु की उपस्थिति में विनम्रता ६. मन की गहरी शान्ति ६. शुद्ध आचरण ७. गुणों की परख ८. शास्त्र के ज्ञान की अनुभूति ८. रूप की सुन्दरता ९. भगवत भक्ति
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