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चाणक्य नीति • अध्याय 11 • श्लोक 14
वापीकूपतडागानामारामसुरवेश्यनाम् । उच्छेदने निराशंकः स विप्रो म्लेच्छ उच्यते ।।
एक ब्राह्मण जो तालाब को, कुए को, टाके को, बगीचे को और मंदिर को नष्ट करता है, वह म्लेच्छ है।
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