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चाणक्य नीति • अध्याय 11 • श्लोक 1
दातृत्वं प्रियवक्तृत्वं धीरत्वमुचितज्ञता । अभ्यासेन न लभ्यन्ते चत्वारः सहजा गुणाः ।।
उदारता, वचनों में मधुरता, साहस, आचरण में विवेक ये बाते कोई पा नहीं सकता ये मूल में होनी चाहिए।
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