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चाणक्य नीति • अध्याय 10 • श्लोक 9
यस्य नास्ति स्वयं प्रज्ञा शास्त्रं तस्य करोति किम् । लोचनाभ्यां विहीनस्य दर्पणः किं करिष्यति ।।
जिसे अपनी कोई अकल नहीं उसकी शास्त्र क्या भलाई करेंगे। एक अँधा आदमी आयने का क्या करेगा।
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