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चाणक्य नीति • अध्याय 10 • श्लोक 6
लुब्धानां याचकः शत्रुमूर्खाणां बोधको रिपुः । जारस्त्रीणां पतिः शत्रुश्चौराणां चन्द्रमा रिपुः ।।
भिखारी यह कंजूस आदमी का दुश्मन है। एक अच्छा सलाहकार एक मुर्ख आदमी का शत्रु है। वह पत्नी जो पर पुरुष में रूचि रखती है, उसके लिए उसका पति ही उसका शत्रु है। जो चोर रात को काम करने निकलता है, चन्द्रमा ही उसका शत्रु है।
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