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बृहत्संहिता • अध्याय 98 • श्लोक 7
मूलशिवशक्र भुजगाधिपानि तीक्ष्णानि तेषु सिद्ध्यन्ति । अभिघातमन्त्रवेतालबन्धवधभेदसम्बन्धाः ॥
मूल, आर्दा, ज्येष्ठा, आश्लेषा- ये तीक्ष्णसंज्ञक नक्षत्र हैं। इनमें अभिघात (उपद्रव), मन्त्र (मन्त्रसाधन प्रयोग), बेताल (बेताल के उत्थापन आदि का कर्म), बन्ध (बन्धन), वध, भेद (मिले हुये दो को अलग करना) और सम्बन्ध (राजकुल में आवेदन) को सिद्धि होती है।
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