मूल, आर्दा, ज्येष्ठा, आश्लेषा- ये तीक्ष्णसंज्ञक नक्षत्र हैं। इनमें अभिघात (उपद्रव), मन्त्र (मन्त्रसाधन प्रयोग), बेताल (बेताल के उत्थापन आदि का कर्म), बन्ध (बन्धन), वध, भेद (मिले हुये दो को अलग करना) और सम्बन्ध (राजकुल में आवेदन) को सिद्धि होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।