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बृहत्संहिता • अध्याय 98 • श्लोक 5
शक्को निऋतिस्तोयं विश्वे ब्रह्मा हरिर्वसुर्वरुणः। अजपादो ऽ हिर्बुध्न्यः पूषाचेतीश्वरा भानाम् ॥
अजचरण ( सूर्यविशेष), अहिर्बुध्न्य (सूर्यविशेष), पूषा (सूर्यविशेष) ये क्रम से अश्विनी आदि नक्षत्रों के स्वामी होते हैं। जैसे-अश्विनीकुमार अश्विनी के, यम भरणी के, अग्नि कृत्तिका के, ब्रह्मा रोहिणी के, चन्द्रमा मृगशिरा के इत्यादि स्वामी होते हैं।
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