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बृहत्संहिता • अध्याय 98 • श्लोक 3
नक्षत्रजमुद्वाहे फलमब्दैस्तारकामितैः सदसत् । दिवसैज्वरस्य नाशो व्याधेरन्यस्य वा वाच्यः ॥
तारों के प्रमाण से नक्षत्रों का फल होता है। जैसे कि विवाह में नक्षत्रों का शुभाशुभ फल तारातुल्य वर्षों में होता है तथा जिस नक्षत्र में ज्वर या अन्य रोग को उत्पत्ति हो, उस नक्षत्र के तारातुल्य दिन में उसका नाश होता है।
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