मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 98 • श्लोक 2
भूतशतपक्षवसवो द्वात्रिंशच्चेति तारकामानम् । क्रमशोऽश्विन्यादीनां कालस्ताराप्रमाणेन ॥
स्वाति में एक, विशाखा में चार, अनुराधा में चार, ज्येष्ठा में तीन, मूल में ग्यारह, पूर्वाषाढ़ा में दो, उत्तराषाढ़ा में दो, अभिजित् में तीन, श्रवण में तीन, धनिष्ठा में चार, शतभिषा में सौ, पूर्वभाद्रपदा में दो, उत्तरभाद्रपदा में दो और रेवती में बत्तीस तारे होते हैं।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें