मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
बृहत्संहिता • अध्याय 98 • श्लोक 17
शुद्धैर्द्वादशकेन्द्रनैधनगृहैः पापैस्त्रिषष्ठायगै लग्ने केन्द्रगतेऽथवा सुरगुरौ दैत्येन्द्रपूज्येऽपि वा। सर्वारम्भफलप्रसिद्धिरुदये राशी च कर्तुः शुभे सग्राम्यस्थिरभोदये च भवनं कार्य प्रवेशोऽपि वा ॥
लग्न से द्वादश, केन्द्र और अष्टम गृह में शुभ ग्रह, तृतीय, षष्ठ और एकादश में पाप ग्रह, लग्न या केन्द्र में बृहस्पति या शुक्र हों तो सब कार्यों की सिद्धि होती है तथा कर्मकर्ता को जन्मराशि, ग्राम्य राशि (मेष, मिथुन, कन्या, तुला, धनु और कुम्भ) या स्थिर राशि (सिंह, वृश्चिक) लग्न में हो तो घर बनाना और गृह में प्रवेश करना शुभ होता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
बृहत्संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

बृहत्संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें