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बृहत्संहिता • अध्याय 98 • श्लोक 16
सावित्रपौष्णानिलमैत्रतिष्यत्वाष्ट्रे तथा चोडुगणाधिपर्ने । संस्कारदीक्षाव्रतमेखलादि कुर्याद् गुरौ शुक्रबुधेन्दुयुक्ते ॥
हस्त, रेवती, स्वाति, अनुराधा, पुष्य, चित्रा, मृगशिरा-इन नक्षत्रों में तथा शुक, बुध, चन्द्र, गुरु-इन वारों में संस्कार (नामकरणादि), दीक्षा, उपनयन, मौजी आदि ( क्षौरकर्म, विद्याग्रहण) कर्मों को करना चाहिये।
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