राजाओं की आज्ञा से, ब्राह्मणों की सम्मति से तथा विवाहकाल में, मरणाशीच, जननाशौच, कैदी के मुक्त होने और यज्ञ-दीक्षा के समय सभी नक्षत्रों में क्षौरकर्म करना शुभ होता है।
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