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बृहत्संहिता • अध्याय 98 • श्लोक 10
मृदुवर्गोऽ नूरायाचित्रापौष्णैन्दवानि सुरतविधिवत्रभूषणमङ्गलगीतेषु च हितानि ॥
मित्रार्थे । अनुराधा, चित्रा, रेवतो, मृगशिरा-ये नक्षत्र मृदुसंज्ञक है। ये सब मित्र, सुरतविधि, वत्र, भूषण, मंगलकार्य और गाने में सुभ होते हैं
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