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बृहत्संहिता • अध्याय 98 • श्लोक 1
शिखिगुणर सेन्द्रियानलशशिविषयगुणर्नुपञ्चवसुपक्षाः । विषयैकचन्द्र भूतार्णवाग्निरुद्राश्विवसुदहनाः ॥
अश्विनी आदि नक्षत्रों के क्रम से शिखि (३) आदि तारे होते हैं। जैसे-अश्विनी में तीन, भरणी में तीन, कृत्तिका में छः, रोहिणी में पाँच, मृगशिरा में तीन, आद्रां में एक, पुनर्वसु में चार, पुष्य में तीन, आश्लेषा में पाँच, मघा में पाँच, पूर्वाफाल्गुनी में दो, उत्तराफाल्गुनी में दो, हस्त में पाँच, चित्रा में एर्के
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