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बृहत्संहिता • अध्याय 97 • श्लोक 8
प्रसवः शुनामरण्ये वन्यानां ग्रामसम्प्रवेशश्च । मधुनिलयतोरणेन्द्रध्वजाश्च वर्षात् समधिकाद्वा ॥
वन में कुत्तों का प्रसव होना, वनैले जीवों का गाँव में प्रवेश करना, शहद के छत्ते का लगाना, तोरण, इन्द्रध्वज-इनका फल एक वर्ष में या उससे भी कुछ अधिक समय में होता है।
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