अक्रियमाणककरणं भूकम्पोऽनुत्सवो दुरिष्टं च । शोषश्चाशोष्याणां स्रोतोऽन्यत्वं च वर्षार्धात् ॥
अक्रियमाण कार्य का (आचाररहित कार्य का, जो कभी नहीं किया, उसका या जो कभी नहीं किया, वह अकस्मात् किया उसका) करना, भूमिकम्प, प्राप्त उत्सव को नहीं करना, अशुभ अनभिमत वस्तु का होना, नहीं सूखने वाले सरोवर आदि का सूखना, नदियों के प्रवाहों का उलटा बहना-इनका फल छः मास में होता है।
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