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बृहत्संहिता • अध्याय 97 • श्लोक 3
त्रिभिरेव धूमकेतोर्मासैः श्वेतस्य सप्तरात्रान्ते । परिवेषेन्द्रचापसन्ध्याभ्रसूचीनाम् ॥
त्वष्टा नामक ग्रह, तामस और कोलक का तत्काल, धूमकेतु का तीन मास में, बेतकेतु का सात रात में तथा सूर्य, चन्द्र के परिवेष, इन्द्रधनुष, सन्ध्या और अप्रसूची का फल सात दिन में होता है।
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