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बृहत्संहिता • अध्याय 97 • श्लोक 14
नवकैकाष्टदशकैकषत्रिकत्रिकर उत्यमासपाकानि । नक्षत्राण्यश्विनिपूर्वकाणि सद्यः फलाश्लेषा ॥
अश्विनी से पुष्य तक के आठ नक्षत्रों के योगतारा में उत्पात हो तो क्रम से नव, एक, अद्वारह, एक, एक, छः, तीन और तीन मास में तथा आश्लेषा तत्काल फल देता है।
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