गन्धर्वनगर, रस (मधुर आदि) में विकार और सुवर्ण में विकार का फल एक
मास में होता है तथा ध्वज का भंग होना, गृह में विकार और धूलियों से व्याप्त सम्पूर्ण दिशाओं का फल भी एक मास में होता है।
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